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दुर्घटना

एक्सीडेंट होने पर क्या करें: रुकना, 24 घंटे में पुलिस को सूचना, और मौके पर कही गई बात

भारत में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 134 के तहत दुर्घटना में शामिल ड्राइवर को घायल के इलाज का इंतज़ाम करना होता है और पुलिस अधिकारी मौजूद न हो तो जल्द से जल्द, और 24 घंटे के भीतर, नज़दीकी थाने में सूचना देनी होती है। हिट-एंड-रन वाली BNS धारा 106(2) अभी लागू नहीं है। मौके पर पहले सेकंडों में कही गई बात किसी काग़ज़ पर नहीं आती, और अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है।

भारत में एक्सीडेंट: रुकना (धारा 132), घायल के इलाज का इंतज़ाम और 24 घंटे में पुलिस को सूचना (धारा 134); BNS 106(2) अभी लागू नहीं; अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं (मलकानी, 1973)।

टक्कर, फिर सन्नाटा। दोनों ड्राइवर गाड़ी से उतरते हैं।

और लगभग हमेशा, पहले कुछ सेकंडों में, कोई वह बात कह देता है जो बाद में सबसे ज़्यादा मायने रखती है। “भाई, मैंने देखा ही नहीं।” “जल्दी में था।” “सॉरी, ग़लती मेरी है।”

फिर नंबर लिए जाते हैं, कुछ फ़ोटो खिंचती हैं, सब अपने रास्ते। और वह वाक्य कहीं दर्ज नहीं होता।

हर दुर्घटना के काग़ज़ में यह लिखने की जगह है कि क्या हुआ। यह लिखने की जगह कहीं नहीं कि क्या कहा गया।

एक नज़र में

सवाल भारत
रुकना ज़रूरी, उचित समय तक (मोटर वाहन अधिनियम धारा 132)
घायल हो तो इलाज का इंतज़ाम, ज़रूरत हो तो अस्पताल (धारा 134(a))
पुलिस को सूचना अधिकारी न हो तो जल्द से जल्द, 24 घंटे के भीतर (धारा 134(b))
हिट-एंड-रन, BNS 106(2) अभी लागू नहीं
अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं (मलकानी, 1973); अदालत में धारा 63 का प्रमाणपत्र

यह लेख भारत के बारे में है। हिंदी बोलने वाले जिन लोगों पर दूसरे देशों का कानून लागू होता है, उनके लिए वह यहाँ नहीं जाँचा गया।

मौके पर कानूनन क्या करना है

  • रुकिए। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 132 के तहत ड्राइवर को कुछ स्थितियों में रुकना और उचित समय तक वहीं रहना होता है।
  • घायल हो तो इलाज का इंतज़ाम। धारा 134(a) के तहत ड्राइवर को घायल व्यक्ति के इलाज के लिए हर उचित कदम उठाना होता है और ज़रूरत हो तो उसे नज़दीकी अस्पताल ले जाना होता है – जब तक भीड़ के ग़ुस्से या आपके नियंत्रण से बाहर किसी वजह से यह संभव न हो।
  • पुलिस को सूचना। धारा 134(b) के तहत पुलिस अधिकारी माँगे तो जानकारी देनी होती है; अधिकारी मौजूद न हो तो जल्द से जल्द, और हर हाल में 24 घंटे के भीतर, नज़दीकी थाने में सूचना देनी होती है।

धारा 132, 133 और 134 के उल्लंघन पर धारा 187 के तहत सज़ा का प्रावधान है।

हिट-एंड-रन पर नया कानून: भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2), जिसमें मौके से भागने और सूचना न देने पर ज़्यादा सज़ा का प्रावधान है, अभी लागू नहीं है। सरकार ने 2 जनवरी 2024 को कहा था कि इसे आगे विचार-विमर्श के बिना लागू नहीं किया जाएगा। लापरवाही से मौत का सामान्य प्रावधान, धारा 106(1), लागू है।

ध्यान दीजिए, कानून क्या माँगता है: रुकना, मदद, सूचना। किसने क्या कहा, इस बारे में कुछ नहीं।

“ग़लती मेरी है” – इस वाक्य का मतलब

घबराहट में कहा गया एक वाक्य अकेले यह तय नहीं करता कि ग़लती किसकी थी। यह परिस्थितियों, ट्रैफ़िक नियमों और सबूतों से तय होता है।

पर वह वाक्य ग़ायब भी नहीं होता। सामने वाला बाद में उसका हवाला दे सकता है। इसलिए सीधा नियम: जिस बात पर आप पक्के नहीं हैं, उसे तथ्य की तरह मत कहिए। “आपको चोट तो नहीं लगी?” और “पूरी ग़लती मेरी थी” दो अलग वाक्य हैं।

और उल्टा भी सच है, यही इस लेख की बात है: अगर दूसरा ड्राइवर कहे कि उसने आपको देखा ही नहीं, तो वह संभालकर रखने लायक है। अगले कुछ दिनों में याददाश्त, अक्सर बिना किसी बुरी नीयत के, ज़्यादा सुविधाजनक रूप ले लेती है।

अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग

सुप्रीम कोर्ट ने 1973 में आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है, और बातचीत प्रासंगिक हो, आवाज़ पहचानी जाए और सटीकता साबित हो तो वह सबूत के रूप में स्वीकार्य है। अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) के तहत प्रमाणपत्र चाहिए, जिसमें फ़ाइल की हैश वैल्यू दर्ज होती है – इसलिए मूल फ़ाइल वैसी ही रखिए। पूरा कानून भारत में बातचीत रिकॉर्ड करना में है; पुलिस मौके पर आए तो क्या पुलिस को रिकॉर्ड कर सकते हैं? देखिए।

समस्या है वह पल। अभी-अभी टक्कर लगी है, दिल तेज़ धड़क रहा है, गाड़ी सड़क से हटानी है, और दूसरा ड्राइवर पास आ चुका है। उस हालत में कोई फ़ोन निकालकर, ऐप खोलकर बटन नहीं दबाता। और असली वाक्य पहले दस सेकंड में ही आ जाता है – रिकॉर्ड बटन हमेशा देर से क्यों दबता है वाली बात, अपने सबसे तीखे रूप में।

TalkSafe Android के लिए एक रिकॉर्डिंग ऐप है, जो पहले से चुना हुआ शब्द सुनते ही रिकॉर्डिंग शुरू करता है – लॉक स्क्रीन पर, फ़ोन अनलॉक किए या ऐप खोले बिना। शब्द को पहचाना जाता है चाहे कोई भी बोले, इसलिए आप वे शब्द सेट कर सकते हैं जो ऐसे मौके पर दूसरा ड्राइवर आम तौर पर बोलता है: “इंश्योरेंस”, “देखा”। ऐसे दो शब्द सेव कीजिए जो एक ही वाक्य में साथ आ सकते हों – “मैंने देखा ही नहीं, इंश्योरेंस से हो जाएगा” – तो पहचान बेहतर होती है। पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रहते हैं।

TalkSafe की स्क्रीन, जिसमें कीवर्ड पहचान चालू है और रोकने का बटन है।
कीवर्ड पहचान चालू। स्क्रीन बंद हो या ऐप बंद हो, तब भी यह बैकग्राउंड में सुनता रहता है।

इसके साथ:

  • गाड़ियाँ हटाने से पहले फ़ोटो: जगह, नुकसान, नंबर प्लेट, साइनबोर्ड।
  • गवाहों के नाम और फ़ोन नंबर, उनके जाने से पहले।

दूसरों की बातचीत रिकॉर्ड करना – कमरे में फ़ोन छोड़कर निकल जाना – आपकी बातचीत नहीं है; किसी संदेश को गैरकानूनी तरीके से इंटरसेप्ट करना दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 42 के तहत अपराध है।

संक्षेप में

  • रुकिए, घायल की मदद कीजिए, और पुलिस न हो तो 24 घंटे के भीतर थाने में सूचना दीजिए (धारा 132, 134)।
  • BNS 106(2) हिट-एंड-रन प्रावधान अभी लागू नहीं; 106(1) लागू है।
  • जिस बात पर पक्के नहीं, उसे तथ्य की तरह मत कहिए। फ़ोटो और गवाह गाड़ियाँ हटाने से पहले।
  • क्या कहा गया, यह किसी काग़ज़ पर नहीं आता – और अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है।

रिकॉर्डिंग के बाद क्या करें: रिकॉर्डिंग के बाद क्या करें, और क्या न करें।

सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए अपनी बीमा कंपनी या किसी वकील से सलाह लीजिए।

एक्सीडेंट होने पर कानूनन क्या करना ज़रूरी है?

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 134 के तहत अगर किसी को चोट लगी है या किसी तीसरे पक्ष की संपत्ति को नुकसान हुआ है, तो ड्राइवर को घायल व्यक्ति के इलाज के लिए हर उचित कदम उठाना होता है और ज़रूरत हो तो उसे नज़दीकी अस्पताल ले जाना होता है, जब तक भीड़ के ग़ुस्से जैसी वजह से यह संभव न हो। पुलिस अधिकारी माँगे तो जानकारी देनी होती है; अधिकारी मौजूद न हो तो जल्द से जल्द, और हर हाल में 24 घंटे के भीतर, नज़दीकी थाने में सूचना देनी होती है।

क्या एक्सीडेंट के बाद रुकना ज़रूरी है?

हाँ। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 132 के तहत ड्राइवर को कुछ स्थितियों में रुकना और उचित समय तक वहीं रहना होता है। धारा 132, 133 और 134 के उल्लंघन पर धारा 187 के तहत सज़ा का प्रावधान है।

क्या हिट-एंड-रन पर 10 साल की सज़ा वाला नया कानून लागू है?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2), जिसमें मौके से भागने और सूचना न देने पर ज़्यादा सज़ा का प्रावधान है, अभी लागू नहीं की गई है। सरकार ने 2 जनवरी 2024 को कहा था कि इसे आगे विचार-विमर्श के बिना लागू नहीं किया जाएगा। लापरवाही से मौत का सामान्य प्रावधान, धारा 106(1), लागू है।

मौके पर 'मेरी ग़लती थी' कहने से क्या मैं ज़िम्मेदार हो जाता हूँ?

घबराहट में कहा गया एक वाक्य अकेले यह तय नहीं करता कि ग़लती किसकी थी; यह परिस्थितियों, ट्रैफ़िक नियमों और सबूतों से तय होता है। फिर भी, जिस बात पर आप पक्के नहीं हैं, उसे तथ्य की तरह न कहना समझदारी है, क्योंकि सामने वाला बाद में उसका हवाला दे सकता है।

क्या दूसरे ड्राइवर से बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने 1973 में आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है, और प्रासंगिक हो, आवाज़ पहचानी जाए और सटीकता साबित हो तो वह सबूत के रूप में स्वीकार्य है। अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत प्रमाणपत्र चाहिए।

TalkSafe एक्सीडेंट के बाद कैसे मदद करता है?

TalkSafe Android के लिए एक रिकॉर्डिंग ऐप है, जो पहले से चुना हुआ शब्द सुनते ही रिकॉर्डिंग शुरू करता है, लॉक स्क्रीन पर भी और ऐप खोले बिना। शब्द को पहचाना जाता है चाहे कोई भी बोले, इसलिए आप वे शब्द सेट कर सकते हैं जो दूसरा ड्राइवर आम तौर पर बोलता है, जैसे 'इंश्योरेंस' और 'देखा'। शुरुआत से पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रहते हैं।