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POSH अधिनियम क्या है? कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत, 3 महीने की समय-सीमा और सबूत
POSH अधिनियम, 2013 कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर लागू होता है। 10 या ज़्यादा कर्मचारियों वाले नियोक्ता को आंतरिक समिति बनानी होती है; शिकायत आख़िरी घटना से 3 महीने के भीतर लिखित में। अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 भी।

चाय के पास शरीर पर की गई टिप्पणी। देर रात “मज़ाक में” भेजा गया मैसेज। कंधे पर ज़रूरत से एक पल ज़्यादा रुका हुआ हाथ। आप कुछ कहती हैं, तो सुनने को मिलता है कि आप ज़्यादा सोच रही हैं।
फिर सवाल रह जाता है: जब कोई देख ही नहीं रहा था, तो साबित कैसे करूँ?
POSH के तहत सबसे बड़ा जोखिम सबूत की कमी नहीं, समय-सीमा है: शिकायत आख़िरी घटना से 3 महीने के भीतर करनी होती है।
एक नज़र में
| सवाल | जवाब | आधार |
|---|---|---|
| किस पर लागू | कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न | POSH अधिनियम, 2013 |
| 10 या ज़्यादा कर्मचारी | नियोक्ता को आंतरिक समिति बनानी होगी | धारा 4 |
| 10 से कम, या शिकायत नियोक्ता के ख़िलाफ़ | ज़िले की स्थानीय समिति | धारा 6 |
| शिकायत की समय-सीमा | लिखित में, 3 महीने; 3 महीने तक बढ़ सकती है | धारा 9 |
| जाँच | 90 दिन में पूरी | धारा 11 |
| आंतरिक समिति न बनाने पर | नियोक्ता पर ₹50,000 तक जुर्माना | धारा 26 |
| अपराध | 3 साल तक (टिप्पणियों पर 1 साल तक) | भारतीय न्याय संहिता, धारा 75 |
| अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग | इंटरसेप्शन नहीं | मलकानी (1973) |
भारत के अलावा जिन देशों में हिंदी बोली जाती है, वे यहाँ शामिल नहीं हैं।
यौन उत्पीड़न किसे कहते हैं
POSH अधिनियम में यौन उत्पीड़न में ये शामिल हैं:
- शारीरिक संपर्क और पहल,
- यौन संबंध की माँग या अनुरोध,
- यौन रंग वाली टिप्पणियाँ,
- अश्लील सामग्री दिखाना,
- यौन प्रकृति का कोई भी अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक आचरण।
दो बातें साफ़ हैं: छूना ज़रूरी नहीं — टिप्पणी, मैसेज और इशारे भी गिने जाते हैं। और कसौटी यह है कि आचरण अवांछित था, न कि सामने वाले का “इरादा” क्या था।
यह अधिनियम पीड़ित महिला के लिए है। पुरुष कर्मचारी इसके तहत शिकायत नहीं कर सकते।
शिकायत कहाँ जाती है
- आंतरिक समिति: जिस नियोक्ता के यहाँ 10 या ज़्यादा कर्मचारी हैं, उसे आंतरिक समिति बनानी होती है (धारा 4)। न बनाने पर नियोक्ता पर ₹50,000 तक जुर्माना है (धारा 26)।
- स्थानीय समिति: जहाँ 10 से कम कर्मचारी होने के कारण आंतरिक समिति नहीं है, या शिकायत ख़ुद नियोक्ता के ख़िलाफ़ है, वहाँ ज़िला अधिकारी की बनाई स्थानीय समिति (धारा 6)।
कार्यवाही गोपनीय रहती है, शिकायत करने वाली के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई निषिद्ध है, और जाँच के दौरान तबादले या छुट्टी जैसी अंतरिम राहत मिल सकती है।
3 महीने: वह समय-सीमा जो छूट जाती है
धारा 9: शिकायत लिखित में, घटना की तारीख़ से — और घटनाओं की शृंखला हो तो आख़िरी घटना से — 3 महीने के भीतर। अगर परिस्थितियों ने समय पर शिकायत करने से रोका, तो समिति लिखित कारण दर्ज करके अवधि 3 महीने तक और बढ़ा सकती है।
समिति को जाँच 90 दिन में पूरी करनी होती है (धारा 11), और नियोक्ता को समिति की सिफ़ारिश पर 60 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होती है (धारा 13)।
बहुत लोग यह तय करने में महीने निकाल देते हैं कि शिकायत करें या नहीं। इसीलिए हर घटना का तारीख़वार रिकॉर्ड उसी दिन बनाइए — बाद में फ़ैसला करने के लिए भी।
यह अपराध भी है: धारा 75
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 75 यौन उत्पीड़न को अपराध बनाती है और पुरानी IPC धारा 354A की जगह आई है:
- शारीरिक संपर्क और पहल, यौन संबंध की माँग, अश्लील सामग्री दिखाना — तीन साल तक का कठोर कारावास, जुर्माना या दोनों।
- यौन रंग वाली टिप्पणियाँ — एक साल तक का कारावास, जुर्माना या दोनों।
सबूत कैसे बनाएँ
- मैसेज और ईमेल — मिटाए जाने से पहले स्क्रीनशॉट।
- गवाह — वह भी, जिसे आपने घटना के ठीक बाद बताया।
- लिखित शिकायत और उसका जवाब।
- मेडिकल और काउंसलिंग के दस्तावेज़।
- तारीख़वार डायरी — हर घटना की तारीख़, समय, जगह, बोले गए शब्द, आसपास कौन था।
- उन बातचीत की रिकॉर्डिंग जिनमें आप शामिल हैं।
अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग
सुप्रीम कोर्ट ने आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1973) में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है, और प्रासंगिक हो, आवाज़ पहचानी जाए और सटीकता साबित हो तो वह सबूत के रूप में स्वीकार्य है।
अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का प्रमाणपत्र चाहिए, जिसमें डिवाइस का ब्योरा और फ़ाइल की हैश वैल्यू दर्ज होती है। इसलिए मूल फ़ाइल वैसी ही रखिए। पूरा कानून भारत में बातचीत रिकॉर्ड करना में है।
दूसरों की बातचीत रिकॉर्ड करना — कमरे में फ़ोन छोड़कर निकल जाना — आपकी बातचीत नहीं है।
TalkSafe कहाँ काम आता है
उत्पीड़न बताकर नहीं आता। जब तक आप फ़ोन निकालें, अनलॉक करें और रिकॉर्ड दबाएँ, वह बात निकल चुकी होती है — और वह हरकत ख़ुद हालात बिगाड़ सकती है।
TalkSafe Android के लिए एक रिकॉर्डिंग ऐप है, जो पहले से चुना हुआ शब्द सुनते ही रिकॉर्डिंग शुरू करता है, लॉक स्क्रीन पर काम करता है, और पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रखता है। शब्द को पहचाना जाता है चाहे कोई भी बोले।

एक स्वाभाविक चुनाव वह शब्द है जो आप उस पल कहेंगी: “रुको”। जैसे ही आप “रुको, यह मत करो” कहती हैं, रिकॉर्डिंग शुरू हो जाती है — और उससे पहले के 30 सेकंड, जिनकी वजह से आपने यह कहा, फ़ाइल में रहते हैं। आपका मना करना भी रिकॉर्ड होता है, और वही दिखाता है कि आचरण अवांछित था।
ट्रिम करने पर मूल फ़ाइल बची रहती है — और धारा 63(4) की हैश वैल्यू उसी मूल फ़ाइल की होती है। विस्तार Android पर वॉइस रिकॉर्डिंग कैसे ट्रिम करें, मूल फ़ाइल खोए बिना में।
संक्षेप में
- POSH अधिनियम, 2013 कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर लागू है; छूना ज़रूरी नहीं।
- शिकायत आंतरिक समिति (10 या ज़्यादा कर्मचारी) या स्थानीय समिति में, लिखित में, 3 महीने के भीतर।
- यौन उत्पीड़न भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 में अपराध भी है।
- अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं (मलकानी, 1973); मूल फ़ाइल रखिए।
यौन नहीं, बल्कि बार-बार अपमान या धमकी: कार्यस्थल पर उत्पीड़न कैसे साबित करें।
रिकॉर्डिंग के साथ बाद में क्या करें: रिकॉर्डिंग के बाद क्या करें, और क्या न करें।
स्टॉकिंग का सबूत कैसे जुटाएँ, यह स्टॉकिंग का सबूत कैसे जुटाएँ: भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 और हर घटना का रिकॉर्ड में है।
सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। POSH की समय-सीमा छोटी है; किसी ख़ास मामले के लिए वकील से सलाह लीजिए।
POSH अधिनियम क्या है?
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 को POSH अधिनियम कहते हैं। यह कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर लागू होता है। इसमें शारीरिक संपर्क और पहल, यौन संबंध की माँग या अनुरोध, यौन रंग वाली टिप्पणियाँ, अश्लील सामग्री दिखाना, और यौन प्रकृति का कोई भी अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक आचरण शामिल है।
POSH के तहत शिकायत कहाँ करें?
जिस नियोक्ता के यहाँ 10 या ज़्यादा कर्मचारी हैं, उसे आंतरिक समिति बनानी होती है, और शिकायत वहीं जाती है। जहाँ 10 से कम कर्मचारी होने के कारण आंतरिक समिति नहीं है, या शिकायत ख़ुद नियोक्ता के ख़िलाफ़ है, वहाँ ज़िला अधिकारी की बनाई स्थानीय समिति में शिकायत की जाती है।
शिकायत कितने समय के भीतर करनी होती है?
POSH अधिनियम की धारा 9 के अनुसार शिकायत लिखित में, घटना की तारीख़ से — और घटनाओं की एक शृंखला हो तो आख़िरी घटना से — 3 महीने के भीतर करनी होती है। अगर परिस्थितियों ने समय पर शिकायत करने से रोका हो, तो समिति लिखित कारण दर्ज करके यह अवधि 3 महीने तक और बढ़ा सकती है।
क्या कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अपराध भी है?
हाँ। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 75 यौन उत्पीड़न को अपराध बनाती है। शारीरिक संपर्क और पहल, यौन संबंध की माँग या अश्लील सामग्री दिखाने पर तीन साल तक का कठोर कारावास, जुर्माना या दोनों; यौन रंग वाली टिप्पणियों पर एक साल तक का कारावास, जुर्माना या दोनों। यह धारा पुरानी IPC धारा 354A की जगह आई है।
क्या मैं उत्पीड़न करने वाले से हुई बातचीत रिकॉर्ड कर सकती हूँ?
सुप्रीम कोर्ट ने आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1973) में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है, और प्रासंगिक हो, आवाज़ पहचानी जाए और सटीकता साबित हो तो वह सबूत के रूप में स्वीकार्य है। अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का प्रमाणपत्र चाहिए, इसलिए मूल फ़ाइल वैसी ही रखिए।
क्या POSH पुरुषों पर भी लागू होता है?
नहीं। POSH अधिनियम पीड़ित महिला के लिए है। पुरुष कर्मचारी इस अधिनियम के तहत शिकायत नहीं कर सकते; उनके लिए नियोक्ता की अपनी नीति या दूसरे कानूनी रास्ते देखने होंगे।