सुरक्षा
स्टॉकिंग का सबूत कैसे जुटाएँ: भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 और हर घटना का रिकॉर्ड
भारत में स्टॉकिंग भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 78 के तहत अपराध है, जिसने IPC की धारा 354D की जगह ली है। पहली बार दोषी ठहराए जाने पर तीन साल तक, दोबारा पर पाँच साल तक की सज़ा। सबूत एक घटना नहीं, जुड़ता हुआ रिकॉर्ड है: मैसेज, कॉल, गवाह और तारीख़वार डायरी। अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है।

वह फिर बस स्टॉप के सामने खड़ा है। आज तीसरा मैसेज, एक नए नंबर से। पिछली बार थाने में पूछा गया था: “सबूत है?”
हर घटना अकेले छोटी लगती है। साथ में नहीं।
स्टॉकिंग दोहराव का अपराध है। इसलिए सबूत भी दोहराना होगा — घटना दर घटना, तारीख़ के साथ।
एक नज़र में
| सवाल | जवाब | आधार |
|---|---|---|
| अपराध | स्टॉकिंग | भारतीय न्याय संहिता, 2023, धारा 78 (पहले IPC 354D) |
| कब से | 1 जुलाई 2024 | — |
| पहली दोषसिद्धि | तीन साल तक कैद और जुर्माना | धारा 78 |
| दोबारा दोषसिद्धि | पाँच साल तक कैद और जुर्माना | धारा 78 |
| अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग | इंटरसेप्शन नहीं | मलकानी (1973) |
| अदालत में पेश करना | हैश वैल्यू वाला प्रमाणपत्र | भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023, धारा 63(4) |
भारत के अलावा जिन देशों में हिंदी बोली जाती है, वे यहाँ शामिल नहीं हैं।
धारा 78 क्या कहती है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 78 स्टॉकिंग को अपराध बनाती है और 1 जुलाई 2024 से IPC की धारा 354D की जगह लागू है। इसमें शामिल है:
- किसी महिला का पीछा करना या उसके साफ़ मना करने के बावजूद बार-बार व्यक्तिगत संपर्क की कोशिश करना;
- उसके इंटरनेट, ईमेल या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार के इस्तेमाल पर नज़र रखना।
सज़ा: पहली बार दोषी ठहराए जाने पर तीन साल तक की कैद और जुर्माना; दूसरी या उसके बाद की दोषसिद्धि पर पाँच साल तक की कैद और जुर्माना।
दो बातें अहम हैं: बार-बार, और साफ़ मना करने के बावजूद। आपके सबूत को यही दिखाना है — इसलिए आपका लिखित “मना” ख़ुद एक सबूत है।
क्या जुटाएँ
- हर मैसेज का स्क्रीनशॉट, तारीख़ और भेजने वाले के साथ — मिटाए जाने से पहले।
- कॉल लॉग और स्टॉकर के छोड़े वॉइस मैसेज।
- तस्वीरें: घर के सामने खड़ी गाड़ी, दरवाज़े पर छोड़ी चीज़ें।
- गवाहों के नाम।
- मेडिकल और काउंसलिंग के दस्तावेज़।
- आपका साफ़ “मना”, एक बार, लिखकर।
- तारीख़वार डायरी: हर घटना की तारीख़, समय, जगह, क्या हुआ, किसने देखा — और आपकी ज़िंदगी में क्या बदला (रास्ता बदला, घर बदला, काम से छुट्टी)।
अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग
सुप्रीम कोर्ट ने आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1973) में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है। धमकी भरी कॉल हो या वह पल जब वह अचानक सामने आ जाए — उस बातचीत में आप शामिल हैं। अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का प्रमाणपत्र चाहिए, इसलिए मूल फ़ाइल वैसी ही रखिए। पूरा कानून भारत में बातचीत रिकॉर्ड करना में है।
मुश्किल वह पल है। कोई बताकर नहीं आता, और उसके सामने फ़ोन निकालना हालात बिगाड़ सकता है।
TalkSafe Android के लिए एक रिकॉर्डिंग ऐप है, जो पहले से चुना हुआ शब्द सुनते ही रिकॉर्डिंग शुरू करता है, लॉक स्क्रीन पर काम करता है, और पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रखता है। शब्द को पहचाना जाता है चाहे कोई भी बोले। एक स्वाभाविक चुनाव वह शब्द है जो आप उस पल कहेंगी: “रुको”। जैसे ही आप कहें “रुको, मेरा पीछा मत करो”, रिकॉर्डिंग शुरू — और उससे पहले की बात भी फ़ाइल में, फ़ोन जेब में ही।

ट्रिम करने पर मूल फ़ाइल बची रहती है — और धारा 63(4) की हैश वैल्यू उसी मूल फ़ाइल की होती है। विस्तार Android पर वॉइस रिकॉर्डिंग कैसे ट्रिम करें, मूल फ़ाइल खोए बिना में।
ऐप वही रिकॉर्ड करता है जो कमरे का माइक्रोफ़ोन सुनता है — वह बातचीत जिसमें आप शामिल हैं। किसी और के फ़ोन में कुछ इंस्टॉल करना या जहाँ आप नहीं हैं वहाँ डिवाइस छोड़ना अलग बात है।
संक्षेप में
- स्टॉकिंग धारा 78 के तहत अपराध है: पहली बार तीन साल तक, दोबारा पाँच साल तक।
- बार-बार और मना करने के बावजूद — यही आपके सबूत को दिखाना है।
- सबूत जुड़ते जाएँ: स्क्रीनशॉट, कॉल लॉग, वॉइस मैसेज, गवाह, लिखित मना, डायरी।
- अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं; मूल फ़ाइल रखिए।
रिकॉर्डिंग के साथ बाद में क्या करें: रिकॉर्डिंग के बाद क्या करें, और क्या न करें।
सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। तुरंत ख़तरा हो तो 112 पर कॉल कीजिए। किसी ख़ास मामले के लिए वकील से सलाह लीजिए।
क्या भारत में स्टॉकिंग अपराध है?
हाँ। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 78 स्टॉकिंग को अपराध बनाती है। यह धारा 1 जुलाई 2024 से IPC की धारा 354D की जगह लागू है। इसमें किसी महिला का पीछा करना या उसके साफ़ मना करने के बावजूद बार-बार व्यक्तिगत संपर्क की कोशिश करना, और उसके इंटरनेट, ईमेल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार के इस्तेमाल पर नज़र रखना शामिल है।
स्टॉकिंग की सज़ा क्या है?
धारा 78 के तहत पहली बार दोषी ठहराए जाने पर तीन साल तक की कैद और जुर्माना, और दूसरी या उसके बाद की दोषसिद्धि पर पाँच साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।
स्टॉकिंग में कौन-से सबूत रखें?
स्टॉकिंग बार-बार होने वाला अपराध है, इसलिए सबूत भी जुड़ते जाने चाहिए: हर मैसेज का तारीख़ वाला स्क्रीनशॉट, कॉल लॉग, स्टॉकर के छोड़े वॉइस मैसेज, तस्वीरें, गवाहों के नाम, मेडिकल रिकॉर्ड, आपका लिखित 'मना' और तारीख़वार डायरी, जिसमें हर घटना की तारीख़, समय, जगह और उसका आपकी ज़िंदगी पर असर लिखा हो।
क्या स्टॉकर से हुई बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1973) में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है। TalkSafe में कीवर्ड के रूप में वह शब्द रखा जा सकता है जो आप उस पल कहेंगे, जैसे 'रुको', और उससे पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रहते हैं। अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का प्रमाणपत्र चाहिए।
क्या धारा 78 पुरुषों पर हुई स्टॉकिंग पर लागू होती है?
धारा 78 का पाठ उस पुरुष पर लागू होता है जो किसी महिला का पीछा करता है। दूसरी स्थितियों में धमकी जैसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 (आपराधिक धमकी) जैसे दूसरे प्रावधान लागू हो सकते हैं; अपने मामले के लिए वकील से सलाह लीजिए।