किराया
मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉज़िट वापस नहीं कर रहा: कानून क्या कहता है और घर लौटाते समय क्या रिकॉर्ड करें
भारत में किराए के सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर कोई एक केंद्रीय कानून लागू नहीं है। मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 आवासीय डिपॉज़िट को दो महीने के किराए तक सीमित करता है और खाली कब्ज़ा लेते समय वापसी कहता है, लेकिन वह राज्यों के अपनाने के लिए है। संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 108(m) के तहत सामान्य टूट-फूट किरायेदार की ज़िम्मेदारी नहीं।

घर खाली हो गया, चाबियाँ दे दीं। मकान मालिक ने कमरों में एक नज़र डाली: “सब ठीक है।”
दो महीने बाद डिपॉज़िट का कोई अता-पता नहीं। बदले में एक मैसेज: पेंटिंग, सफ़ाई, फ़र्श — 30,000 रुपये कटेंगे।
घर लौटाते समय जो कहा जाता है, वही अक्सर सबसे अच्छा सबूत होता है — और अक्सर वही कहीं लिखा नहीं होता।
एक नज़र में
| सवाल | जवाब | आधार |
|---|---|---|
| देशभर पर लागू डिपॉज़िट कानून | नहीं | — |
| मॉडल अधिनियम में सीमा | आवासीय 2 महीने, गैर-आवासीय 6 महीने का किराया | मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 |
| मॉडल अधिनियम में वापसी | खाली कब्ज़ा लेते समय, बकाया काटकर | मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 |
| मॉडल अधिनियम कहाँ लागू | राज्यों के अपनाने पर; यहाँ राज्यवार सत्यापित नहीं | — |
| सामान्य टूट-फूट | किरायेदार की ज़िम्मेदारी नहीं | संपत्ति अंतरण अधिनियम, धारा 108(m) |
| अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग | इंटरसेप्शन नहीं | मलकानी (1973) |
भारत के अलावा जिन देशों में हिंदी बोली जाती है, वे यहाँ शामिल नहीं हैं।
एक केंद्रीय कानून नहीं है
केंद्र सरकार ने 2 जून 2021 को मॉडल किरायेदारी अधिनियम को मंज़ूरी दी। इसमें:
- आवासीय मकान के लिए डिपॉज़िट दो महीने के किराए तक, गैर-आवासीय के लिए छह महीने तक;
- मकान मालिक खाली कब्ज़ा लेते समय, किरायेदार की बकाया देनदारी काटकर, डिपॉज़िट लौटाएगा।
लेकिन यह अपने आप देशभर का कानून नहीं बना। इसे राज्यों को नया कानून बनाकर या पुराने कानून में बदलाव करके अपनाना होता है। आपके राज्य में यह लागू है या नहीं, हमने यहाँ राज्यवार सत्यापित नहीं किया। इसलिए असल में बहुत कुछ आपके किराया अनुबंध पर टिका होता है।
सामान्य टूट-फूट आपकी ज़िम्मेदारी नहीं
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 108(m) के तहत किरायेदार को पट्टा ख़त्म होने पर संपत्ति उसी अच्छी हालत में लौटानी होती है जिसमें उसे मिली थी — सिवाय उन बदलावों के जो उचित टूट-फूट या अदम्य बल से हुए हों।
फीका पड़ा पेंट, चलने-फिरने के निशान, सामान्य इस्तेमाल से हुई घिसावट — यह रहना है, नुकसान नहीं। इसके आगे का नुकसान हुआ, यह मकान मालिक को दिखाना होगा।
घर लौटाना ही फ़ैसला करता है
- आते समय: हर मौजूदा कमी की तारीख़ वाली तस्वीरें और वीडियो, और अगर हो सके तो लिखित सूची।
- छोड़ते समय: मकान मालिक के साथ हर कमरा देखिए। वह जो “ठीक है” कहे, उसे लिखवाइए या मैसेज में पुष्टि लीजिए।
- चाबी देने की तारीख़ का सबूत रखिए।
- रसीदें — किराया और डिपॉज़िट दोनों की।
मुश्किल यह है कि बहुत कुछ सिर्फ़ बोला जाता है: “ये छोटे छेद कोई बात नहीं।” “पेंट तो हम वैसे भी करवाएँगे।” कहीं लिखा नहीं होता।
अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग
सुप्रीम कोर्ट ने आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1973) में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है। अदालत में पेश करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का प्रमाणपत्र चाहिए, इसलिए मूल फ़ाइल वैसी ही रखिए। पूरा कानून भारत में बातचीत रिकॉर्ड करना में है।
घर लौटाते समय आपके हाथ भरे होते हैं — तस्वीरों के लिए फ़ोन, चाबियाँ, सामान।
TalkSafe Android के लिए एक रिकॉर्डिंग ऐप है, जो पहले से चुना हुआ शब्द सुनते ही रिकॉर्डिंग शुरू करता है, लॉक स्क्रीन पर काम करता है, और पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रखता है। शब्द को पहचाना जाता है चाहे कोई भी बोले, इसलिए आप वह रख सकते हैं जो मकान मालिक संभवतः बोलेगा: “डिपॉज़िट”, “सब ठीक है”। जैसे ही वह कहे “सब ठीक है, डिपॉज़िट लौटा दूँगा”, रिकॉर्डिंग शुरू — और उससे पहले की बात भी फ़ाइल में।

ट्रिम करने पर मूल फ़ाइल बची रहती है। विस्तार Android पर वॉइस रिकॉर्डिंग कैसे ट्रिम करें, मूल फ़ाइल खोए बिना में।
फिर मैसेज से पुष्टि कीजिए: “आज घर सौंपते समय आपने कहा कि सब ठीक है और डिपॉज़िट पूरा लौटेगा।”
संक्षेप में
- सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर कोई एक केंद्रीय कानून नहीं; मॉडल अधिनियम 2021 राज्यों के अपनाने के लिए है।
- मॉडल अधिनियम में आवासीय डिपॉज़िट दो महीने तक, और वापसी खाली कब्ज़ा लेते समय।
- सामान्य टूट-फूट आपकी ज़िम्मेदारी नहीं (धारा 108(m))।
- तस्वीरें, रसीदें, और घर लौटाते समय की अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग — फिर लिखित पुष्टि।
रिकॉर्डिंग के साथ बाद में क्या करें: रिकॉर्डिंग के बाद क्या करें, और क्या न करें।
सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। अपने राज्य के कानून के लिए किसी वकील से सलाह लीजिए।
क्या भारत में सिक्योरिटी डिपॉज़िट की कोई सीमा है?
पूरे देश पर लागू कोई एक सीमा नहीं है। केंद्र सरकार का मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 आवासीय मकान के लिए डिपॉज़िट को दो महीने के किराए तक और गैर-आवासीय के लिए छह महीने के किराए तक सीमित करता है, लेकिन यह अपने आप देशभर का कानून नहीं बना — इसे राज्यों को अपने कानून के ज़रिए अपनाना होता है। आपके राज्य में क्या लागू है, यह राज्य के किरायेदारी कानून और आपके अनुबंध से तय होता है।
डिपॉज़िट कब वापस मिलना चाहिए?
मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 के अनुसार मकान मालिक को किरायेदार से खाली कब्ज़ा लेते समय, किरायेदार की बकाया देनदारी काटकर, डिपॉज़िट लौटाना होता है। जहाँ यह मॉडल अधिनियम लागू नहीं है, वहाँ अनुबंध की शर्तें और राज्य का कानून देखें।
क्या मकान मालिक पेंटिंग का पैसा काट सकता है?
सामान्य टूट-फूट के लिए नहीं। संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 108(m) के तहत किरायेदार को पट्टा ख़त्म होने पर संपत्ति उसी अच्छी हालत में लौटानी होती है जिसमें उसे मिली थी, सिवाय उन बदलावों के जो उचित टूट-फूट या अदम्य बल से हुए हों। इसके आगे का नुकसान मकान मालिक को साबित करना होगा।
क्या घर लौटाते समय बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने आर. एम. मलकानी बनाम महाराष्ट्र राज्य (1973) में कहा कि बातचीत के एक पक्ष की अनुमति से की गई रिकॉर्डिंग इंटरसेप्शन नहीं है। TalkSafe में कीवर्ड के रूप में वह शब्द रखा जा सकता है जो मकान मालिक संभवतः बोलेगा, जैसे 'डिपॉज़िट', और उससे पहले के 30 सेकंड भी फ़ाइल में रहते हैं।
सबसे मज़बूत सबूत क्या है?
मकान में आते और छोड़ते समय की तारीख़ वाली तस्वीरें और वीडियो, लिखित अनुबंध, किराए और डिपॉज़िट के भुगतान की रसीदें, और मकान मालिक से हुए मैसेज। घर लौटाते समय मकान मालिक ने जो कहा, उसकी रिकॉर्डिंग और उसके बाद भेजा गया पुष्टि वाला मैसेज भी काम आता है।